फौजा सिंह: दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन रनर की प्रेरक कहानी
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जब ज़िंदगी में उम्मीदें कम होने लगती हैं, तब कुछ लोग ऐसे उदाहरण बन जाते हैं जो साबित कर देते हैं कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। फौजा सिंह उन्हीं में से एक हैं। उन्होंने 89 साल की उम्र में पहली मैराथन पूरी कर दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन धावक का खिताब हासिल किया।
बचपन की कठिन शुरुआत
फौजा सिंह का जन्म 1 अप्रैल 1911 को पंजाब, भारत में हुआ था। उनका बचपन कठिन था। पांच साल की उम्र तक वे चल भी नहीं पाते थे। डॉक्टरों ने यहां तक कह दिया था कि वे सामान्य जीवन नहीं जी पाएंगे। लेकिन फौजा सिंह ने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे अपने शरीर को मजबूत बनाया।
ब्रिटेन में बसने का सफर
1992 में फौजा सिंह अपने परिवार के साथ ब्रिटेन चले गए। वहां उन्होंने बुढ़ापे को घर में बैठकर नहीं बिताया, बल्कि दौड़ना शुरू किया ताकि वे खुद को फिट रख सकें। असली मोड़ आया 89 साल की उम्र में, जब उन्होंने अपनी पहली मैराथन दौड़ने का फैसला किया।
पहली मैराथन और आगे का सफर
साल 2000 में उन्होंने लंदन मैराथन में हिस्सा लिया और 42 किलोमीटर की दौड़ पूरी की। इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क, टोरंटो और हांगकांग जैसी मैराथन में भाग लेकर लोगों को चौंका दिया।
- 2003 में टोरंटो वॉटरफ्रंट मैराथन पूरी की – उम्र 92 साल
- 2011 में 100 की उम्र में मैराथन पूरी कर इतिहास रचा
- ‘टर्बन टॉरनेडो’ के नाम से प्रसिद्ध हुए
फिटनेस का मंत्र
फौजा सिंह की फिटनेस का राज है – सादा भोजन, नियमित कसरत और सकारात्मक सोच। उनका मानना है, “मैं अपने शरीर को मंदिर मानता हूं और उसमें कभी गंदगी नहीं भरता।”
- शुद्ध शाकाहारी भोजन
- रोज़ाना सुबह दौड़ना
- तनाव से दूर रहना
रिकॉर्ड्स और पहचान
हालांकि Guinness World Records ने उनकी उम्र की आधिकारिक पुष्टि नहीं की (क्योंकि उनके पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं था), फिर भी उन्होंने कई अनौपचारिक रिकॉर्ड बनाए।
- 100 वर्ष की उम्र में मैराथन पूरी करने वाले पहले व्यक्ति
- 90 की उम्र के बाद 8 मैराथन पूरी कीं
- 2012 लंदन ओलंपिक में ओलंपिक टॉर्च ले जाने का सम्मान
प्रेरणादायक जीवन पर किताबें
उनके जीवन पर “Turbaned Tornado” नामक किताब लिखी गई है, जिसमें बताया गया है कि कैसे एक आम किसान ने उम्र के सौवें पड़ाव पर भी असाधारण उपलब्धियां हासिल कीं।
ह्यूमन टच
फौजा सिंह कहते हैं, “मैं युवाओं को एक ही बात कहना चाहता हूं – उठो, दौड़ो, जियो। जीवन में कभी देर नहीं होती, बस शुरुआत करनी चाहिए।” उनका जीवन हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो सोचता है कि अब देर हो चुकी है।
निष्कर्ष
फौजा सिंह की कहानी हमें यह सिखाती है कि उम्र कभी भी सपनों की राह में रुकावट नहीं बन सकती। अगर मन में सच्ची इच्छा और समर्पण हो, तो असंभव कुछ भी नहीं।
